किसान संगठन ने कहा – योगी सरकार पर नहीं है भरोसा, राज्यपाल करें हस्तक्षेप

उत्तर प्रदेश में साल 2014 से साल 2016 तक ओलावृष्टि और सूखे के नाम पर जो मुआवजा बांटा गया, उसमें से अस्सी प्रतिशत हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया।
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में साल 2014 से साल 2016 तक ओलावृष्टि और सूखे के नाम पर जो मुआवजा बांटा गया, उसमें से अस्सी प्रतिशत हिस्सा भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। अधिकारियों की नाकामी के कारण प्रदेश का किसान बदतर हालत में पहुंच गया है। किसानों की कर्ज माफ़ी को लेकर भी सरकार ने अभी तक अपने निर्णय को क्रियान्वित नहीं किया है। ऐसे आरोपों के साथ राष्ट्रीय किसान मंच के प्रतिनिधिमंडल ने आज प्रदेश के राज्यपाल राम नाइक को ज्ञापन दिया। 

राष्ट्रीय किसान मंच के अध्यक्ष शेखर दीक्षित ने कहा कि भाजपा के प्रति किसानों ने आस्था व्यक्त करते हुए उत्तर प्रदेश में कर्ज माफी की अभिलाषा में सत्ता में स्थापित कराने मे सहयोग किया। कर्ज माफी में अभी तक कोई ठोस रूप रेखा जमीनी स्तर पर नहीं बन पाई है। इसके लिए राष्ट्रीय किसान मंच ने मुख्यमंत्री को  8 मई को अवगत कराया गया। इस मामले की जानकारी राष्ट्रीय किसान मंच को अभी तक नहीं प्राप्त हुई है। मध्य प्रदेश के मंदसौर मे दिल दहलाने वाली लोकतंत्र की हत्या करने जैसी घटना सामने आने पर 7 किसानों के बलिदान के बाद आज देश का एवं प्रदेश का किसान रोष मे है।

मंच ने मांग की है कि राज्यपाल इस मामले में खुद हस्तक्षेप करें। राज्यपाल से अनुरोध किया गया कि राज्य सरकार को निर्देशित करें कि राज्य सरकार गरीबों और किसानों को उनका वाजिब हक देने के लिए कोई ठोस नीतिगत निर्णय ले ताकि प्रदेश के किसानों की गेहूं खरीद के भुगतान से संबन्धित लम्बित मामले तथा गन्ना किसानों का बकाये भुगतान के यथा शीघ्र भुगतान करने एवं किसानों के अन्य लम्बित मामलों को जल्द निस्तारित किया जा सके। ज्ञापन देने वाले प्रतिनिधिमंडल में राष्ट्रीय प्रवक्ता अखिलेश कुमार ‘‘राजन’’, प्रदेश अध्यक्ष प्रशान्त तिवारी, महिला सेल की अध्यक्ष ऋचा एवं संगठन मंत्री संजय कुमार शामिल रहे। 

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