बैंक हैं या हत्यारे? -1

State Bank of India #MustAnswer #Ruthlessness

चेन्नई के एक किसान भाई गणसेकरन ने लोन पर ट्रैक्टर लिया था, आठ लाख का पर हालातों के चलते वो उसे चुकाने में असफल रहा।
लोन ना चुका पाने के एवज में जब भारतीय स्टेट बैंक के एजेंट उनके यहाँ ट्रैक्टर को लेने पहुंचे, तो थोड़ी हाथापाई होने लगी जो लाज़मी थी। किसान न जाने कितने सपने देख कर, पाई पाई जुटा कर कोई चीज़ खरीदता है और फिर अपने खून पसीने को एक कर के खेती में लग जाता है। तो जब ट्रैक्टर ले जाने की बात आयी, दुःख तो होना ही था।
झगडे में स्टेट बैंक के एजेंट ने गणसेकरन जी की छाती पर वार कर दिया जिससे वो बेहोश हो गए और जब अस्पताल ले कर पहुंचे तो उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
हमारा सवाल है की यह कहाँ की गुंडागर्दी है? बैंक बनाये जाते हैं हमारी मदद के लिए, सेवा के लिए पर ये कोई तरीका हुआ? किसी की जान ही चले जाए? गौरतलब बात यह है की गणसेकरन के शुगर मिल की तरफ ३ लाख रूपए बकाया थे। जब पेमेंट होगी ही नहीं तो कोई कैसे आगे राशि देगा? कितने निर्दयी, संवेदनशून्य और क्रूर हो चले हैं लोग की किसी की परेशानी भी नहीं समझ पाते? सरकार की नाक के नीचे ये सब होता रहेगा और सब हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे! शर्मनाक है ये!
और स्टेट बैंक के तो क्या कहने! आम जनता किसी भी बैंक से सबसे ज़्यादा अगर परेशान है तो वो है भारतीय स्टेट बैंक।
भगवान गणसेकरन जी की आत्मा को शांति प्रदान करे!

आपका,
शेखर दीक्षित

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